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गाँव के सरकारी स्कूल से धनबाद में GST Inspector बनने तक का सफर: मिलिए गांडेय के लाल आकाश कुमार अग्रवाल से

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  कहते हैं कि अगर इरादों में जान हो और हौसलों में उड़ान, तो संसाधनों की कमी कभी भी आपकी सफलता के आड़े नहीं आ सकती। इस बात को अक्षरशः सच कर दिखाया है झारखंड के गिरिडीह जिले के एक बेहद छोटे और शांत गाँव पहारदहा (फुल्ची पंचायत, गांडेय प्रखंड) के रहने वाले युवा आकाश कुमार अग्रवाल ने। आकाश ने देश की सबसे कठिन और प्रतिष्ठित परीक्षाओं में से एक SSC CGL (Staff Selection Commission - Combined Graduate Level Exam) में न सिर्फ सफलता का परचम लहराया, बल्कि लगातार दो बार टॉप रैंक हासिल कर पूरे गांडेय प्रखंड और गिरिडीह जिले का नाम रोशन किया है। आज वे भारत सरकार के वित्त मंत्रालय के तहत जीएसटी इंस्पेक्टर (GST Inspector) के रूप में अपने होमटाउन धनबाद में तैनात हैं। आइए जानते हैं जमीन से जुड़े एक साधारण मध्यमवर्गीय परिवार के इस होनहार लड़के की असाधारण और प्रेरणादायक कहानी। 1. जड़ों से जुड़ाव: जबरदहा से फुल्ची और गिरिडीह कॉलेज तक का सफर आकाश कुमार अग्रवाल के पिता श्री संजय अग्रवाल एक साधारण मध्यमवर्गीय परिवार से आते हैं। आकाश की शुरुआती शिक्षा किसी बड़े शहर के महंगे कॉन्वेंट स्कूल में नहीं, बल्कि अपन...

Omicron ALERT in Jharkhand : कैसे होगी राज्य में ओमिक्रोन की जांच, पूरे झारखंड में एक भी लैब नहीं

 Omicron ALERT in Jharkhand कोरोना का नया वैरिएंट ओमिक्रोन डेल्टा से भी ज्यादा खतरनाक बताया जा रहा है। देश के कई राज्यों में इसके मरीज मिल चुके हैं। हालांकि झारखंड अभी अछूता है लेकिन राज्य में ओमिक्रोन की टेस्टिंग के लिए एक भी लैब नहीं है...

जमशेदपुर: कोरोना की पहली लहर जैसी स्थिति फिर से उत्पन्न हो गई है। देश में जब कोरोना के मरीज मिलने लगे थे तब झारखंड में जांच की व्यवस्था नहीं थी। संदिग्धों का नमूना लेकर पूणे भेजा जाता था। लेकिन, कुछ ही दिन के बाद जमशेदपुर में झारखंड का पहला लैब स्थापित किया गया। उसके बाद जांच में तेजी आई और फिर मरीजों की पहचान होने लगी।


जल्द कदम उठाने की जरूरत


ओमिक्रोन को लेकर भी कुछ इसी तरह के कदम जल्द ही उठाए जाने की जरूरत है। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आइएमए) के पूर्व अध्यक्ष डॉ. आरएल अग्रवाल ने कहा कि देश में ओमिक्रोन के रोगी तेजी से बढ़ने लगे हैं। देशभर से लोग एक राज्य से दूसरे राज्यों में आ-जा रहे हैं, जो चिंता का विषय है। अगर, इनकी जांच नहीं हुई तो फिर संक्रमण रोक पाना मुश्किल होगा। 


राज्य में नहीं हैं जांच की सुविधा

झारखंड में ओमिक्रोन वैरियंट की जांच करने के लिए लैब नहीं है। ऐसे में अगर कोई संदिग्ध मरीज मिलता है तो उसका नमूना लेकर भुवनेश्वर जांच के लिए भेजा जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि भुवनेश्वर लैब पर पहले से ही काफी ज्यादा लोड है, जिसके कारण रिपोर्ट आने में 15 से 20 दिन का समय लग जाता है, जो खतरनाक साबित हो सकता है। डॉ. आरएल अग्रवाल ने कहा कि जांच की सुविधा जमशेदपुर में भी किया जाना चाहिए। ताकि वायरस की पहचान सही समय पर हो और उसके रोकथाम को उचित कदम उठाया जा सकें।


दो माह में 453 लोग विदेश से आएं


पूर्वी सिंहभूम जिले में बीते दो माह में कुल 453 लोग विदेश से आएं है। इसमें सबसे अधिक सउदी अरब व अमेरिका से आए लोग शामिल हैं। जिला सर्विलांस विभाग के अनुसार, अक्टूबर माह में 147 व नवंबर माह से पांच दिसंबर तक कुल 306 लोग लौटे हैं। इसमें 174 लोगों की जांच हुई है। सभी की रिपोर्ट निगेटिव आई है।

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