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गाँव के सरकारी स्कूल से धनबाद में GST Inspector बनने तक का सफर: मिलिए गांडेय के लाल आकाश कुमार अग्रवाल से

 

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कहते हैं कि अगर इरादों में जान हो और हौसलों में उड़ान, तो संसाधनों की कमी कभी भी आपकी सफलता के आड़े नहीं आ सकती। इस बात को अक्षरशः सच कर दिखाया है झारखंड के गिरिडीह जिले के एक बेहद छोटे और शांत गाँव पहारदहा (फुल्ची पंचायत, गांडेय प्रखंड) के रहने वाले युवा आकाश कुमार अग्रवाल ने।

आकाश ने देश की सबसे कठिन और प्रतिष्ठित परीक्षाओं में से एक SSC CGL (Staff Selection Commission - Combined Graduate Level Exam) में न सिर्फ सफलता का परचम लहराया, बल्कि लगातार दो बार टॉप रैंक हासिल कर पूरे गांडेय प्रखंड और गिरिडीह जिले का नाम रोशन किया है। आज वे भारत सरकार के वित्त मंत्रालय के तहत जीएसटी इंस्पेक्टर (GST Inspector) के रूप में अपने होमटाउन धनबाद में तैनात हैं।

आइए जानते हैं जमीन से जुड़े एक साधारण मध्यमवर्गीय परिवार के इस होनहार लड़के की असाधारण और प्रेरणादायक कहानी।


1. जड़ों से जुड़ाव: जबरदहा से फुल्ची और गिरिडीह कॉलेज तक का सफर

आकाश कुमार अग्रवाल के पिता श्री संजय अग्रवाल एक साधारण मध्यमवर्गीय परिवार से आते हैं। आकाश की शुरुआती शिक्षा किसी बड़े शहर के महंगे कॉन्वेंट स्कूल में नहीं, बल्कि अपने ही इलाके के स्थानीय स्कूलों में हुई।

प्रारंभिक शिक्षा: आकाश ने अपनी मिडिल स्कूल की पढ़ाई पास के जबरदहा गाँव से पूरी की।

हाई स्कूल: इसके बाद माध्यमिक शिक्षा के लिए उन्होंने फुल्ची गाँव का रुख किया। गाँव की इन्हीं पगडंडियों पर चलते हुए आकाश के मन में कुछ बड़ा करने का सपना पल रहा था।

उच्च शिक्षा: स्कूल की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने गिरिडीह कॉलेज, गिरिडीह से अपना ग्रेजुएशन (स्नातक) पूरा किया।


2. न दिल्ली गए, न रांची: गिरिडीह में ही रहकर रचा इतिहास

आमतौर पर यह माना जाता है कि अगर आपको एसएससी, यूपीएससी या किसी बड़ी प्रतियोगी परीक्षा में सफलता पानी है, तो आपको दिल्ली, पटना या रांची जैसे बड़े कोचिंग हब में जाकर लाखों रुपये खर्च करने होंगे। लेकिन आकाश ने इस पुरानी धारणा को पूरी तरह से तोड़ दिया।

ग्रेजुएशन के बाद आकाश ने गिरिडीह में ही रहने का फैसला किया। उन्होंने अपनी मेहनत, इंटरनेट के सही इस्तेमाल और स्थानीय संसाधनों के दम पर सेल्फ-स्टडी (स्वयं अध्ययन) को अपना सबसे बड़ा हथियार बनाया। दिन-रात की कड़ी तपस्या और बिना किसी बड़े शहर के चकाचौंध के, वे अपने बंद कमरे में किताबों के साथ अपनी तकदीर लिखते रहे।


3. सफलता का पहला पड़ाव: SSC CGL 2023 और मुंबई में इनकम टैक्स इंस्पेक्टर

आकाश की मेहनत का फल तब मिला जब SSC CGL 2023 के परिणाम घोषित हुए। उन्होंने अखिल भारतीय स्तर पर बेहद शानदार रैंक हासिल की और उनका चयन भारत सरकार के सबसे पावरफुल विभागों में से एक में इनकम टैक्स इंस्पेक्टर (Income Tax Inspector) के पद पर हुआ।

फरवरी 2024 में उन्हें सपनों के शहर मुंबई में पहली जॉइनिंग मिली। एक ग्रामीण पृष्ठभूमि से निकलकर सीधे मुंबई जैसे महानगर में क्लास-बी सरकारी अधिकारी बनना किसी भी युवा के लिए एक बहुत बड़ी उपलब्धि थी। परिवार में खुशी का माहौल था और पूरा पहारदहा गाँव अपने इस लाल पर गर्व कर रहा था।


4. दिल में थी अपनी मिट्टी की चाह: दोबारा परीक्षा और धनबाद में GST Inspector

अधिकतर लोग एक बार इंस्पेक्टर की नौकरी मिलने के बाद संतुष्ट हो जाते हैं और आराम की जिंदगी जीने लगते हैं। लेकिन आकाश की कहानी में एक और दिलचस्प मोड़ आना बाकी था। मुंबई की व्यस्त नौकरी और नए माहौल के बीच भी आकाश के दिल में अपनी झारखंड की मिट्टी और अपने परिवार के पास रहने की चाहत थी।

नौकरी के साथ समय निकालना बेहद मुश्किल था, लेकिन आकाश ने हार नहीं मानी। उन्होंने ड्यूटी के बाद बचे हुए समय में फिर से पढ़ाई की और SSC CGL 2024 की परीक्षा में शामिल हुए।

इस बार उनकी तैयारी और भी ज्यादा मजबूत थी। जब रिजल्ट आया, तो आकाश ने पिछली बार से भी कहीं बेहतर और टॉप रैंक हासिल की। इस शानदार रैंक का सबसे बड़ा फायदा यह हुआ कि उन्हें भारत सरकार की तरफ से अपना होमटाउन (गृह क्षेत्र) चुनने का विकल्प मिला।

इस बार उनका चयन जीएसटी इंस्पेक्टर (GST Inspector) के रूप में हुआ और उन्हें अपनी मनपसंद पोस्टिंग धनबाद (Jharkhand) में मिली। आकाश ने तुरंत धनबाद में अपनी जॉइनिंग की और वर्तमान में वे यहीं अपनी सेवाएं दे रहे हैं।


5. युवाओं के लिए सबसे बड़े रोल मॉडल

पहारदहा जैसे गाँव, जहां की साक्षरता दर पहले से ही करीब 79.96% (जो झारखंड के औसत से बहुत बेहतर है) है, वहां आकाश की यह सफलता आग में घी का काम कर रही है। अब गांव और आस-पास के प्रखंडों के युवाओं को यह समझ आ गया है कि सफलता इस बात पर निर्भर नहीं करती कि आप कहां से आए हैं, बल्कि इस बात पर निर्भर करती है कि आप जाना कहां चाहते हैं।

आकाश कुमार अग्रवाल की यह जादुई यात्रा सिखाती है कि:

निरंतरता (Consistency) ही कुंजी है: मुंबई में नौकरी करते हुए भी पढ़ाई जारी रखना उनकी अद्भुत एकाग्रता को दिखाता है।

संतुष्ट न होना: अगर आपमें और बेहतर करने की क्षमता है, तो कभी भी एक जगह मत रुकिए।

अपनी जड़ों का सम्मान: बड़ी सफलता मिलने के बाद भी अपनी मिट्टी (झारखंड) के पास लौटकर सेवा करने का निर्णय काबिले तारीफ है।

हमारी वेबसाइट की पूरी टीम की ओर से आकाश कुमार अग्रवाल और उनके पूरे परिवार को इस ऐतिहासिक सफलता के लिए ढेर सारी शुभकामनाएं! आप ऐसे ही देश और राज्य की सेवा करते रहें।

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